कहीं आपका बच्चा तनावग्रस्त तो नहीं हैं? जानिए Expert से...

छोटे बच्चे कच्ची मिट्‍टी की तरह होते हैं, जिन्हें संस्कार और मार्गदर्शन की थाप से मनचाहा आकार दिया जा सकता है, लेकिन हल्की-सी गलत चोट से वे बिखर भी सकते हैं और दिशाहीन भी हो सकते हैं। दरअसल, आज के दौर में स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी तनावग्रस्त हो जाते हैं। यह तनाव शारीरिक भी हो सकता है और मानसिक भी। ऐसे में शिक्षकों के साथ ही पैरेंट्‍स की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों में पल रहे तनाव को पहचानने के साथ ही उसे दूर करने का पुरजोर प्रयास करें। 
 
मस्कत के इंडियन स्कूल में एकेडमिक सुपरवाइजर के रूप में कार्य कर रहे अनिल बरतरे आरसीआई (RCI) रजिस्टर्ड काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट भी हैं। वेबदुनिया से बातचीत में अनिल बताते हैं कि हर पैरेंट्‍स के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर बच्चे तनावग्रस्त क्यों होते हैं और उनके इस तनाव को कैसे पहचाना जाए। 
 
बच्चों के मित्र बनें : अनिल कहते हैं कि पैरेंट्‍स और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार पर करीबी नजर रखना चाहि‍ए। यदि उनके व्यवहार में परिवर्तन दिखता है, जैसे- क्लास में एक्टिविटी में भाग न लेना, सवालों के जवाब न देना, खेल के मैदान में झगड़ा, सामान फेंकना, जिद करना, चिड़चिड़ापन, गुमसुम रहना, चुप रहना, दूसरों से मिलने से बचना, अपनी बातें शेयर नहीं करना, गुस्सा, स्कूल से मिलने वाले होमवर्क को पूरा नहीं कर पाना आदि ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
 
इस तरह के लक्षणों से कई बार पैरेंट्‍स यह समझ लेते हैं कि बच्चा बिगड़ रहा है, लेकिन हकीकत में वह तनाव से गुजर रहा होता है। ऐसे में जरूरी है कि उससे मित्रवत व्यवहार कर उसकी समस्याओं को समझें, उससे बात करें और जरूरत पड़ने पर उसका सहयोग भी करें।
समस्या को समझें : किसी भी समस्या के समाधान से पहले उसे समझना जरूरी होता है। कई बार पैरेंट्‍स ही बच्चे के तनाव का कारण बन जाते हैं। कई बार देखने में आता है कि अभिभावक बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं। दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं। उन पर अपनी पसंद थोपते हैं। ऐसा भूलकर भी नहीं करें क्योंकि हर बच्चे की क्षमताएं अलग-अलग होती हैं।
आज के दौर में तनाव की बड़ी वजह यह भी देखने में आ रही है कि स्कूल टाइम बहुत ज्यादा होता है, इसके चलते बच्चा अपने लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाता। कई बार स्कूल के टास्क पूरे नहीं कर पाता साथ ही नींद भी पूरी नहीं ले पाता। ऐसे में तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि कोरोनाकाल में बच्चों की शिक्षा ऑनलाइन हुई है। इस दौर में बच्चों को अलग तरह की समस्याएं देखने को मिली हैं।
 
कैसे दूर करें बच्चों का तनाव : बच्चे तनाव में न रहें इसके लिए उनके व्यवहार पर नजर रखें, उन्हें टाइम मैनेजमेंट सिखाएं ताकि वे अपना काम समय पर पूरा कर सकें, यदि स्कूल का होमवर्क ज्यादा है तो उसे पूरा करने में सहयोग करें। उन पर दबाव न डालें। अत्यधिक प्रेशर से विकृतियां पैदा होती हैं। 
 
अनिल कहते हैं कि एक बात जरूर में मन में बैठा लें कि आपका बच्चा यूनिक है, वह किसी से कम नहीं है। बस, उसकी वैरायटी अलग हो सकती है। ठीक उसी तरह जैसे अलग-अलग रंग होते हैं। पैरेंट्‍स की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के साथ अच्छी-अच्छी बातें करें, उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं। उनकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखें साथ ही उसके काम की तारीफ भी करें।  
 
पैरेंटिंग की शिक्षा : अनिल कहते हैं कि आजकल बच्चों में तनाव तुलनात्मक रूप से ज्यादा देखने को मिल रहा है। जब माता-पिता दोनों जॉब में होते हैं तो वे बच्चे पर पूरा ध्यान नहीं रख पाते हैं। वे कहते हैं कि पैरेंटिंग की शिक्षा से तात्पर्य पैरेंट्‍स का उच्च शिक्षित होना या डॉक्टर और इंजीनियर होना जरूरी नहीं है। कई बार उच्च शिक्षित पैरेंट्‍स द्वारा भी बच्चों को पीटने की खबरें सामने आती हैं।

पैरेंटिंग की शिक्षा से तात्पर्य बच्चों की उचित देखरेख से है फिर वह चाहे किसी भी स्तर पर हो। बरतरे कहते हैं कि सबसे ज्यादा काउंसलिंग की जरूरत बचपन में होती है। क्योंकि बचपन में यदि कोई समस्या रह जाती है तो उसका असर जीवनभर देखने को मिलता है।

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