देश में आज से नए इंटरनेट युग का आगाज, कैसे काम करता है 5G? क्या होगा फायदा?

शनिवार, 1 अक्टूबर 2022 (07:45 IST)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस-2022’ के उद्घाटन के अवसर पर 5जी इंटरनेट की औपचारिक रूप से शुरुआत की। इसके बाद भारत में 5जी स्‍पीड के साथ इंटरनेट चलेगा। इस स्‍पीड के आने से नेटवर्क कंजेशन और बफरिंग जैसी समस्‍या खत्‍म हो जाएगी। यानी भारत में इंटरनेट की स्‍पीड 10 गुना हो जाएगी।

ALSO READ: 5G In India: इंटरनेट की स्‍पीड तो बढ़ेगी, इस ‘रफ्तार’ से क्‍या कोई खतरा भी है, पिछले दिनों क्‍यों उठा था 5G को लेकर दुनिया में विवाद?
5G को अलग अलग फेज में देशभर में लांच किया जाएगा। पहले फेज में 13 शहरों का नंबर है। रिलायंस जियो दिवाली तक दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट सेवाएं शुरू करेगी।
 
रिलायंस इंडस्ट्रीज की 45वीं एजीएम में रिलायंस के मुखिया मुकेश अंबानी ने घोषणा की थी कि भारत के महानगरों में दिवाली तक Jio 5G सर्विस की शुरुआत हो जाएगी। रिलायंस 2 लाख करोड़ का निवेश 5G नेटवर्क में करेगा। सभी 22 टेलीकॉम सर्किल्स में प्रीमियम 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में 5जी स्पेक्ट्रम खरीदने वाला जियो अकेला ऑपरेटर है। Jio 5G ब्रॉडबैंड का नाम 'Jio Air Fibre' होगा।
 
वहीं, भारती एयरटेल ने भी 2023 के अंत तक सभी शहरों में 5जी सेवा पहुंचाने का वादा कर रखा है। 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में एयरटेल ने जियो के बाद सबसे अधिक पैसा खर्च किया है।
 
कैसे काम करता है 5G?
दरअसल 5जी में सी बैंड का रेंज 3.7 से 3.98GHz होता है और ये अल्टीमीटर 4.2 से 4.4GHZ की रेंज में काम करते हैं। ऐसे में 5जी के बैंड की फ्रीक्वेंसी और अल्टीमीटर रेडियो की फ्रीक्वेंसी काफी करीब हो रही है। जिससे अच्‍छी स्‍पीड मिलती है।
 
कैसे 5G तकनीक से होगा फायदा?
5G नेटवर्क पर 4G के मुकाबले 100 गुना ज्यादा इंटरनेट स्पीड मिलेगी। सिर्फ इंटरनेट ही नहीं कॉल और नेटवर्क कनेक्टिविटी भी बढ जाएगी। फिलहाल 2G या 3G नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे यूजर्स को कॉल ड्रॉप और कनेक्टिविटी से जुड़ी कई तरह की समस्‍याएं आती हैं। जबकि 4G नेटवर्क का इस्‍तेताल करने वाले यूजर्स को अच्‍छी क्वालिटी मिलती है। ऐसे में 5G आने के बाद यूजर्स को बेहतर कॉल और कनेक्टिविटी मिलेगी।
 
4G नेटवर्क पर यूजर्स को जहां 100Mbps की स्पीड मिलती है। वहीं 5G नेटवर्क पर 10Gbps तक की स्पीड मिलेगी। हालांकि, 10Gbps की स्पीड बहुत ज्‍यादा होती है। इसका मतलब होता है कि इस स्पीड पर कुछ ही सेकंड में एक पूरी फिल्‍म डाउनलोड हो सकती है।
 
कितने तरह का होता है 5G?
5G नेटवर्क मुख्य तौर पर चार तरह की टेक्नोलॉजी Non-standalone 5G (NSA-5G), standalone 5G (SA-5G), Sub-6 GHz और mmWave पर काम करता है। किसी भी रीजन में इन चार टेक्नोलॉजी के जरिए से ही 5G नेटवर्क को यूजर्स के डिवाइस तक पहुंचाया जाता है।
 
Non-standalone 5G
इसे बेसिक 5G नेटवर्क बैंड कहा जाता है और शुरुआत में किसी भी रीजन में नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर्स इसी बैंड के आधार पर यूजर्स को 5G नेटवर्क उपलब्ध करवाती हैं। इसमें 4G LTE के लिए उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर को इस्तेमाल करके 5G नेटवर्क को डिप्लॉय किया जाता है। किसी भी रीजन में नेटवर्क की टेस्टिंग के लिए टेलिकॉम कंपनियां इसी स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करती हैं।
 
Standalone 5G
ये नेटवर्क बैंड पुराने 4G LTE नेटवर्क पर रिलाई नहीं करता है। ये खुद के क्लाउड नेटिव नेटवर्क कोर पर काम करता है। दुनिया के कई देशों में इस स्पेक्ट्रम को अडोप्ट किया है और वहां ये काम कर रहा है।
 
Sub-6 GHz
इसे मिड बैंड 5G स्पेक्ट्रम फ्रिक्वेंसी कहा जाता है। इसमें नेटवर्क की फ्रिक्वेंसी 6GHz से कम होती है और इसका इस्तेमाल लो बैंड टेलिकम्युनिकेशन्स के लिए किया जाता है। चीन समेत कई देशों में इस नेटवर्क स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया जाता है।
 
mmWave
इसे हाई बैंड 5G नेटवर्क फ्रिक्वेंसी कहा जाता है। इसमें 24GHz से ऊपर की फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें ज्यादा बैंडविथ मिलता है। इसमें डाटा की स्पीड 1Gbps तक की होती है। mmWave को डिप्लॉय करने के लिए कई छोटे और लोअर रेंज के सेलफोन टॉवर का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि कवरेज को पूरा किया जा सके।
 
डायनैमिक नेटवर्क शेयरिंग
4G से 5G में नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए टेलिकॉम कंपनियां डायनैमिक नेटवर्क शेयरिंग का इस्तेमाल करती हैं। ये तकनीक NSA 5G स्पेक्ट्रम के साथ ही संभव है, क्योंकि इसमें 5G नेटवर्क एक साथ दो रेडियो फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल कर सकती है। जिसकी मदद से डाटा की स्पीड बढ़ जाएगी और डिवाइस 4G LTE के मुकाबले ज्यादा तेजी से नेटवर्क को एक्सेस कर सकेंगे। sub-6 GHz फ्रिक्वेंसी का फायदा ये है कि ये फ्रिक्वेंसी किसी भी सॉलिड ऑब्जेक्ट जैसे कि बिल्डिंग आदि को पेनिट्रेट करके 5G नेटवर्क कनेक्टिविटी को बरकरार रखती है। इसकी वजह से इंडोर में भी आपको नेटवर्क कनेक्टिविटी मिलती रहगी।

Edited by : Nrapendra Gupta 

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी