गणतंत्र दिवस : राजपथ पर दिखा शौर्य और विभिन्न कलाओं का अनूठा नजारा

शनिवार, 26 जनवरी 2019 (16:28 IST)
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के मौके पर शनिवार को राजपथ पर सामरिक शौर्य, सुरक्षा, सभ्यता और संस्कृति का अद्भुत संगम तथा विभिन्न लोक कलाओं का अनूठा नजारा देखने को मिला। इस बार की झांकियां राष्ट्रपति महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को समर्पित रहीं। राजपथ पर सबसे पहले सिक्किम की झांकी निकली, जिसमें बापू की कल्पनाओं एवं दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य में होने वाली शत-प्रतिशत जैविक खेती को दर्शाया गया। इसे लोगों ने काफी सराहा और कलाकारों की हौसलाअफजाई के लिए तालियां बजाईं।

महाराष्ट्र की झांकी में महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन की झलक दिखाई गई, इससे लोगों के दिमाग में देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियां ताजी हो गईं और लोगों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में उठ खड़े हुए और तालियां बजाकर उनके प्रति आदर प्रकट किया।

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की झांकी में बापू द्वारा वहां के सेलुलर जेल में कैदियों के साथ बिताए गए लम्‍हों को दिखाया गया। इस दौरान लोगों ने शांत होकर गांधीजी की कैदियों को दी जाने वाली प्रेरणा सुनी और उनके सम्मान में तालियां बजाईं।

गोवा की झांकी में गांधीजी के सिद्धांत सर्व धर्म सम्भाव का अनुसरण करने वाले अहिंसापूर्ण-सह-अस्तित्व की दीर्घकालीन परंपरा को दर्शाया गया, इस दौरान दर्शकों ने खड़े होकर बापू के सम्मान में तालियां बजाईं।

सूर्योदय की धरती अरुणाचल प्रदेश की झांकी में गांधी के मूल मंत्र स्वच्छता पर आधारित स्वच्छ मोंपा गांव के  शांतिपूर्ण सांस्कृतिक जीवन को दिखाया गया, जिसे देखकर लोग काफी प्रभावित हुए और आपस में सफाई की बात करते हुए दिखाई दिए।

असम की झांकी में कुटीर उद्योग के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के सपनों के साथ बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए बापू के चलाए गए राष्ट्रीय आंदोलनों को दर्शाया गया, जिसे असम के लोगों ने काफी ध्यान से देखा और उनके सम्मान में तालियां बजाईं। 
 
त्रिपुरा की झांकी में गांधीजी के सिद्धांतों पर आधारित समतावादी और एथनिक संस्कृतियों को दर्शाया गया, जिसे लोगों ने काफी सराहा।
तमिलनाडु की झांकी में किसानों की दशा को देखकर महात्मा गांधी के पहनावे में आए बदलाव को दिखाया गया। 21 सितंबर 1921 में तमिलनाडु के मदुरै दौरे पर गए बापू किसानों की दुर्दशा को बहुत दुखी हुए थे। उन्होंने देखा कि किसानों के पास तन ढंकने के लिए कपड़े नहीं हैं। उनके बदन पर पुराने, फटे तथा नाममात्र के कपड़े थे। इसको देखकर बापू ने बदन को ढंकने के लिए सिर्फ धोती पहनने का फैसला ले लिया। इस दौरान लोगों ने बापू के सम्मान में तालियां बजाईं।

पंजाब की झांकी में 13 अप्रैल 1919 में घटित हुई जालियांवाला बाग की उस हृदयविदारक घटना को दर्शाया गया, जिसमें ब्रिगेडियर जनरल रेजीनल्ड एडवर्ड हैरी डायर की अगुवाई में ब्रिटिश सेना ने आजादी के मतवालों पर गोलियां बरसाई थीं। इस दौरान दर्शक अंग्रेजों की क्रूरता की निंदा और इस घटना में शहीद हुए देश के सपूतों को सलाम करते हुए दिखाई दिए।

गुजरात की झांकी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बाल्य अवस्था, सरदार पटेल से साथ बिताए गए लम्‍हों और उनकी डांडी यात्रा को दिखाया गया, जिसे दर्शकों ने शांतिपूर्वक देखा और राष्ट्रपिता के सम्मान में तालियां बजाईं। जम्मू-कश्मीर की झांकी में बापू के 1947 में राज्य के दौरे और शांति स्थापित करने की कोशिशों को दर्शाया गया, जिसकी लोगों ने काफी सराहना की। इसी तरह कर्नाटक की झांकी में 1924 में कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन को दिखाया गया, जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी।

देवभूमि उत्तराखंड की झांकी में ‘अनासक्ति आश्रम’ को दर्शाया गया। बापू 1929 में इस आश्रम में गए थे। इस दौरान उत्तराखंड के लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। दिल्ली सरकार की झांकी में राष्ट्रपिता के बिरला हाउस में बिताए गए दिनों को दिखाया गया। वे 1915 से 1948 के बीच 80 बार दिल्ली आए थे और इस दौरान बिरला हाउस में 720 दिन बिताए थे। इस झांकी के प्रदर्शन के दौरान लोग नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या और उनके द्वारा देश की आजादी के लिए किए गए योगदान की चर्चा करते सुनाई दिए।

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