उनकी बहनों, शिरीन जीजीभॉय और डीना जीजीभॉय को संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा, यानी करीब 800 करोड़ रुपए मिलेंगे। उनके भाई जिमी नवल टाटा, जो 82 साल के हैं, को जुहू का आलीशान बंगला, चांदी की वस्तुएं और गहने विरासत में मिलेंगे। करीबी दोस्त मेहली मिस्त्री को अलीबाग की संपत्ति और तीन बंदूकें दी गई हैं। वहीं, टाटा समूह के पूर्व कर्मचारी और रतन टाटा के विश्वासपात्र रहे मोहिनी मोहन दत्त को भी शेष संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा मिलेगा। लेकिन टाटा सन्स के शेयरों को लेकर दत्त का दावा अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि ये शेयर विशेष रूप से धर्मार्थ ट्रस्टों के लिए आरक्षित हैं।
मोहिनी मोहन दत्त का सवाल, विवाद या स्पष्टीकरण?
मोहिनी मोहन दत्त का नाम अब सुर्खियों में है। वकीलों के अनुसार, दत्त ने वसीयत को चुनौती नहीं दी, बल्कि केवल अपने हिस्से पर स्पष्टता मांगी है। लेकिन यह सवाल भी कम सनसनीखेज नहीं है। क्या यह रतन टाटा के उस विश्वास पर चोट है, जो उन्होंने अपने सहयोगियों में दिखाया था? या फिर यह एक इंसान का हक मांगने की भावुक पुकार है, जिसने टाटा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया? इस मामले की सुनवाई के लिए वसीयत के निष्पादकों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को मध्यस्थता के लिए नियुक्त किया गया है।