सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे बाद में कोई भी भाषा सीख सकते हैं। सच्ची प्रगति नवाचार में निहित है, भाषा थोपने में नहीं। तमिल जिंदाबाद, हिंदी थोपना बंद करो। इससे पहले द्रमुक सदस्यों को संबोधित एक पत्र में उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु हिंदी और संस्कृत को तमिल पर हावी नहीं होने देगा। स्टालिन ने कहा कि द्रमुक राज्य और इसकी भाषा की रक्षा के संघर्ष में हमेशा आगे रहेगी। उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि हिंदी विरोधी आंदोलन के कारण ही 1939 में मद्रास प्रांत के तत्कालीन राज्यपाल ने हिंदी लागू करने का निर्णय वापस ले लिया था।
अन्नामलाई ने पूछा कि वे क्या हिन्दी को बढ़ावा दे रहे हैं। एनईपी तीन भाषा नीति की वकालत करती है जिसमें किसी भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा माना जाएगा। राज्य में 2 अलग-अलग नियम क्यों हैं? एक निजी स्कूल के छात्र को तीसरी भाषा सीखने का अवसर प्रदान किया जाता है तो हमारे सरकारी स्कूल के छात्रों को इससे वंचित क्यों रखा जाता है?(भाषा)