एबीवीपी की हार राजनीतिक बदलाव का संकेत : मायावती

रविवार, 24 सितम्बर 2017 (16:22 IST)
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को कहा कि देश के प्रतिष्ठित ​जेएनयू, दिविवि, राजस्थान, गुवाहाटी विश्वविद्यालयों के बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की हार राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
 
मायावती ने यहां एक बयान में कहा कि देश के अतिप्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), राजस्थान व गुवाहाटी विश्वविद्यालयों के बाद अब हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के महत्वपूर्ण चुनाव में भाजपा-आरएसएस (भाजपा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से संबद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की करारी हार देश के राजनीतिक बदलाव का नया शुभ शकुन है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने जनता को विभिन्न प्रकार से बरगलाकर अपने अच्छे दिन बहुत देख लिए हैं और अब देश की जनता उनको उनके बुरे दिन दिखाने का मन बना रही है।
 
मायावती ने कहा कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में एबीवीपी की करारी शिकस्त व एएसजे (एलायंस फॉर सोशल जस्टिस) गठबंधन की शानदार जीत वास्तव में दलित छात्र रोहित वेमुला को बेहतरीन श्रद्धांजलि है। ये नतीजे केंद्र की भाजपा सरकार को सबक हैं कि वह दलितविरोधी हरकतों से अब भी बाज आ जाए ताकि देश में किसी अन्य रोहित वेमुला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।
 
मायावती ने कहा कि सरकार का ध्यान सिर्फ कुछ मुट्ठीभर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्ना सेठों पर है। उन्हें छोड़कर देश के 125 करोड़ लोगों के जीवन-मरण से जुड़ीं समस्याओं जैसे आसमान छूती हुई महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, अशिक्षा व स्वास्थ्य सेवा के अभाव पर सरकार का ध्यान नहीं है।
 
उन्होंने कहा कि लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व विभिन्न राज्यों में भाजपा की सरकारें इन विकट राष्ट्रीय समस्याओं के प्रति घोर लापरवाह व उदासीन बनी हुई हैं अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में विफल साबित हो रही हैं। इससे देश की जनता खासकर छात्रों एवं युवा वर्ग में जो बेचैनी व आक्रोश है, वह अब विभिन्न रूपों में उबलकर सामने आने लगा है। 
 
विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव परिणाम इस बात के प्रमाण हैं कि लोग गौरक्षा, घर वापसी, लव जिहाद, एंटी रोमियो, देशगान व राष्ट्रीय सुरक्षा आदि भावनात्मक मुद्दों के चंगुल से निकलकर जीवन के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं। 
 
उन्होंने कहा कि भयंकर महंगाई व भीषण बेरोजगारी का मुद्दा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है जिसमें मोदी सरकार की नीतियां बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई हैं। इनका कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) का खास मंत्रालय भी नकारा साबित हुआ है, क्योंकि स्वयं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के आंकड़े बता रहे हैं कि देशभर में जिन लगभग 30 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया और उनमें से केवल 10 प्रतिशत (2.9 लाख) लोगों को ही नौकरी के प्रस्ताव मिले।
 
मायावती ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में मोदी सरकार सहित भाजपा की राज्य सरकारों का भी रिकॉर्ड बहुत ज्यादा खराब है। वह सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने में फिसड्डी साबित हो रही है।
 
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि दलितों व पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित लाखों सरकारी पद भी खाली पड़े हुए हैं जिससे आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह से निष्क्रिय व निष्प्रभावी साबित हो रही है। इससे 'बीजेपी एंड कंपनी' की आरक्षणविरोधी नीति व नजरिया साफतौर पर नजर आता है।
 
उन्होंने कहा कि जहां तक उत्तरप्रदेश में भाजपा के शासनकाल में अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था एवं जनहित व विकास का सवाल है तो योगी सरकार के 6 महीने के कार्यकाल के दौरान ही जितनी आपराधिक घटनाएं, दुर्घटनाएं, व्यापारिक अपहरण व हत्याएं हुई हैं, उनसे जनता का सरकार से मोहभंग हो गया है, परंतु अपनी तसल्ली के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेतागण खासकर मोदी और योगी अकसर एक-दूसरे की तारीफें करते रहते हैं ताकि जनता का ध्यान बांटा जा सके।
 
उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तरप्रदेश में एक ही पार्टी यानी भाजपा की सरकार होने के जो फायदे लोगों को बताए गए थे, वे हवा-हवाई बातें साबित हो रही हैं। जनता से वादाखिलाफी, कथनी व करनी में अंतर, बिना पूरी तैयारी के ही आपाधापी में नोटबंदी व जीएसटी को देश पर थोपना आदि ऐसे कुछ खास कारण हैं जिनसे भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारों से देश की जनता व व्यापारी वर्ग का मोहभंग हो गया है और वे सब अब भाजपा को कड़ा सबक सिखाने पर आतुर हैं। (भाषा)

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