अदालत ने कहा, 'आरोपी पर लगे आरोपों की गंभीरता और उनकी पिछली गतिविधियों को देखते हुए यह अंदेशा है कि वह गवाहों को भयभीत कर सकते हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं, इस चरण में अग्रिम जमानत का कोई आधार नहीं बनता, अर्जी खारिज की जाती है।'
हालांकि अदालत ने याचिका को रद्द करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उनका बयान सत्य प्रतीत नहीं होता क्योंकि जांच अधिकारी ने बताया है कि उन्होंने डीसीपी (केंद्रीय जिला) के आगंतुक रजिस्टर को जांचा था, जिसमें सात फरवरी के दिन आरोपी का नाम दर्ज नहीं है।