Fact Check: क्या किसान आंदोलन को सोशल मीडिया पर दबाने के लिए सरकार ने लगाए जैमर? जानिए सच

सोमवार, 14 दिसंबर 2020 (11:16 IST)
केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। किसान कानून रद्द करने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर किसानों के आंदोलन को भारी समर्थन मिल रहा है। इस बीच एक खबर जमकर वायरल हो रही है कि केंद्र सरकार किसान आंदोलन को सोशल मीडिया पर दबाने के लिए जैमर का इस्तेमाल कर रही है।

क्या है वायरल खबर में-

एक अखबार की खबर में बताया गया है कि सरकार राजधानी दिल्ली के समीप जिन बॉर्डर पर किसान आंदोलन हो रहे हैं, वहां-वहां जैमर लगा दिए हैं ताकि सोशल मीडिया पर इसकी खबरें ज्यादा ना जा सकें।

क्या है सच-

भारत सरकार की प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने वायरल हो रही खबर को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन को दबाने के लिए जैमर नहीं लगाए हैं। PIB फैक्ट चेक के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा गया है- “दावा : एक खबर में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन को दबाने के लिए जैमर लगाए हैं। PIBFactCheck : यह दावा फर्जी है। केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।”

दावा : एक #खबर में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन को दबाने के लिए जैमर लगाए हैं। #PIBFactCheck : यह दावा #फ़र्ज़ी है। केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। pic.twitter.com/lpadTBJHLu

— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) December 12, 2020


इससे पहले PIB ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के साथ किए गए दावे का खंडन किया था कि दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सेना को बुलाया गया है। PIB ने बताया था कि वायरल हो रहा वीडियो सैनिकों की नियमित आवाजाही का वीडियो है और उसका किसान प्रदर्शन के साथ कोई भी संबंध नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए, सेना को बुलाया गया है।#PIBFactCheck: यह दावा फर्जी है। यह सैनिकों की नियमित आवाजाही का एक वीडियो है और किसान प्रदर्शन के साथ इसका कोई भी सम्बंध दुर्भावनापूर्ण और गलत है। pic.twitter.com/R2ZX69otHt

— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) December 11, 2020

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