डॉ. छाया मंगल मिश्र

सामाजिक विचारक, प्रोफेसर और संवेदनशील लेखिका
कोरोना काल के बाद यह तय है कि मानव समाज के प्रत्येक व्यवहार में दिन और रात का अंतर देखने को मिलेगा।आइए नजर डालते हैं...
आभूषणों ने मानव जाति व समाज में अपनी अलग और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे वह सोना-चांदी हो, हीरे हों, रूबी, नीलम, पन्ना,...
लॉक डाउन के दौरान सोशल मीडिया पर ही पूरा घर-बंद देश उमड़ पड़ा... क्योंकि बाकि बचे हुए तो जीने मरने, अपने देश-गांव की मिटटी...
ना बीबी न भैया “सबसे बड़ा रुपइया” सभी ने सुना होगा। यह पैसा जो सिक्के में या नोटों में भले ही अलग-अलग आकार, रंग-रूप, वजन...
हम अपने शरीर को कितना जानते हैं,आइए आज इस पर चर्चा करते हैं... मानव शरीर में इतना सल्फर होता है कि एक कुत्ते पर मौजूद सारे...
संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
सती प्रथा हिंदू धर्म में प्रचलित एक कुरीति है, जबकि सती प्रथा मूल हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं है
युद्ध के समय जब सेनाएं आमने-सामने खड़ी हो गईं ....तो अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए योगेश्वर श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश...
‘कोरोना पॉजिटिव’ नाम है हृदय। जैसा नाम है वैसा ही है। हम इंदौरियों की खास बात यह है कि पहचानते तो सभी को हैं। पर पहचान...
पिछले दिनों अख़बारों में एक खास खबर के रूप में नौसेना पायलट का अनूठे अंदाज का निमंत्रण पढने में आया। जिसमें उसने लिखा...
चानी के बेटे किशु का आई.आई. टी. में सिलेक्शन हुआ। भुवनेश्वर का कोई कॉलेज मिला। चानी ने याद किया कि कोई अपना है क्या वहां।...
कभी ध्यान से सुनना, नन्हें शिशु के पैरों में बंधी छन-छन करती पायलों की स्वर लहरी, सारे संगीत फीके हैं उसके आगे। नववधू...
बात ज्यादा पुरानी नहीं है। मेरे पास एक सहायक थी घरेलू कामों में सहायता के लिए। बेहद ईमानदार, मेहनती, दुबली-पतली पर जीवट।...
दुनिया में पाई जाने वाली जीव-जन्तुओं की लाखो प्रजातियों में भिन्न-भिन्न विशेषताएं पाई जाती हैं
अंग्रेजी उपन्यास ‘द टाइम मशीन’ की तर्ज पर ‘टाइम ट्रेवल’ की अनुमति दे दे और मुझे द्वापर युग के अंत में ले जा कर श्रीकृष्ण...
भगवान श्री कृष्ण हम सबको प्रिय हैं,आइए जानते हैं उन पर किसने क्या रचा है...
हम कितना ही स्वतंत्रता का ढोल पीटें आज भी हमारे घरों में ही डलहौजी अजर अमर हो प्रेत की तरह साथ रहते हैं। समाज में सबके...
‘कबीर माया डाकिनी, सब काहू को खाय दांत उपारुं पापिनी, सन्तो नियरै जाय’।
बड़े भाई-बहनों पर हाथ उठा देने में तुम्हें कभी भी मलाल नहीं हुआ। तुम एक अच्छी टीचर होंगी, पर बच्चों को तो मां चाहिए होती...
उनमें मुझे हमेशा देवी के नौ रूपों के दर्शन होते रहे। ‘शैल पुत्री’ के रूप में शक्तिशाली और साहसी. परिवार के सभी संकटों,...