पाकिस्तान ने आखिर मान ही लिया कि हमारे यहां मौजूद है जैश सरगना मसूद अजहर

शुक्रवार, 1 मार्च 2019 (09:22 IST)
नई दिल्ली। आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के पाकिस्तान में होने की बाद आखिरकार पाकिस्तान ने स्वीकार कर ही ली। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, 'जितना मेरी जानकारी है वह काफी बीमार है। वह इतना बीमार है कि वह घर से बाहर नहीं जा सकता।' उन्होंने ये भी कहा कि परिस्थिति काफी गंभीर है क्योंकि भारत ने हमारे एयर स्पेस का उल्लंघन किया और हमारे देश में बम गिराया।

 
सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'मेरा संदेश भारतीयों के लिए है कि पाकिस्तान में नई सरकार है जिसका नया एजेंडा है। यह भारत के लिए भी एक मौका है। हम देश में आर्थिक प्रगति चाहते हैं। पाकिस्तान की नई सरकार अफगानिस्तान सहित पूरे क्षेत्र में शांति चाहती है। हम किसी भी हालत में पाकिस्तानी जमीन का भारत सहित किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देंगे।' उन्होंने ये भी कहा कि हमारी सरकार को सेना का पूरी तरह से समर्थन है।
 
 
यह पूछे जाने पर कि मसूद अजहर जैसे आतंकी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा? जबकि वह एक ऐसे संगठन का मुखिया है जो भारी आतंक फैला रहा है। इस पर पाक विदेश मंत्री ने कहा, "अगर भारत हमें पुख्ता सबूत दे जो कि पाकिस्तानी कोर्ट में पेश किया जा सके। इसके बाद हम पाकिस्तानी कोर्ट का रुख करेंगे। अगर वहां मसूद के खिलाफ फैसला जाता है तो निश्चित तौर पर हम उस पर कार्रवाई करेंगे और पाकिस्तानी आवाम को भी बता पाएंगे कि उसे किन मामलों में गिरफ्तार किया गया है।"
 
 
जब पाक विदेश मंत्री से पूछा गया क्या अब भी मसूद अजहर के आतंकी होने को लेकर उनको संदेह है तो उन्होंने कहा, "इसमें मेरे मानने या न मानने से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह एक कानूनी मसला है। अगर कानूनी कार्रवाई के दौरान उसे दोषी माना जाता है तो उसपर कार्रवाई करने में हमें कोई मसला नहीं है।"
 
 
यह पूछे जाने पर कि संयुक्त राष्ट्रसंघ (UN) से उनकी हालिया मसले को लेकर क्या बातचीत हुई? क्या यूएन ने उनकी किसी मदद की बात की या उन्होंने यूएन से सुरक्षा मसलों पर कोई बातचीत की। क्या अमे‌रिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे इस मसले पर कोई बातचीत की। इस पर शाह मोहम्मद कुरेशी ने कहा, "मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद देना चाहूंगा। वे इस मसले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही यूएन भी इस मामले में एक महती भूमिका निभा सकता है। हमारे रिश्ते यूएन से सालों से हैं। हम करीब एक दशक से अफगानिस्तान में शांति के लिए एक साथ काम कर रहे हैं।"
 

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