Nitish Kumar cabinet expansion in Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव से नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार में पूरी तरह भाजपा के प्रभाव नजर आया। मंत्री पद की शपथ लेने वाले सभी सातों विधायक भाजपा के ही थे। इस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल पर भाजपा का ही वर्चस्व स्थापित हो गया। यूं तो भाजपा के मंत्रियों की संख्या पहले ही ज्यादा थी, लेकिन अब जेडीयू के मुकाबले भाजपा के मंत्रियों की संख्या काफी ज्यादा हो गई है।
भाजपा के 7 मंत्री, 7 जातियां : नए बनाए गए मंत्रियों की जातियों पर गौर करें तो भाजपा के 'चुनावी गणित' को साफ समझा जा सकता है। इस विस्तार के माध्यम से भाजपा ने 7 जातियों को साधने का प्रयास किया। इनमें केवट, कुर्मी, राजपूत, भूमिहार, कुशवाहा, तेली और वैश्य समुदाय प्रमुख हैं। साहेबगंज सीट से विधायक राजू सिंह चौहान को इसलिए मंत्री बनाया गया है वे राजपूत हैं और समाज में उनका प्रभाव भी है। वे 4 बार के विधायक हैं और पूर्व में जेडीयू, लोजपा और वीआईपी पार्टी में भी रह चुके हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना राजनीतिक सफर शुरू वाले जीवेश मिश्रा जाले सीट से विधायक हैं। उनको मंत्री बनाकर भाजपा ने भूमिहार समुदाय को साधने की कोशिश की है। मिश्रा 2020 में भी बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। जेडीयू छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुनील सिंह का कुशवाहा समाज में अच्छा प्रभाव है। वे वर्तमान में बिहार शरीफ सीट से विधायक हैं। वैश्य समुदाय को साधने लिए भाजपा ने संजय सरावगी को मंत्री बनवाया है। सरावगी 2005 से लगातार विधायक हैं।
नीतीश की कुर्सी को फिलहार खतरा नहीं, लेकिन... : हालांकि अगले चुनाव तक तो नीतीश कुमार की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है, लेकिन चुनाव के बाद इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें फिर मुख्यमंत्री नसीब होगा। यदि भाजपा और जदयू की फिर से सत्ता में वापसी होती है तो अगला मुख्यमंत्री भाजपा का हो सकता है। यह ठीक वैसे ही होगा जैसा महाराष्ट्र में हुआ था। विधानसभा चुनाव के बाद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री नहीं रह पाए थे। उन्हें डिप्टी सीएम बनकर संतोष करना पड़ा था। हालांकि राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही पता लगेगा। फिलहाल तो नीतीश के पास दुखी होने का कोई कारण नजर नहीं आता।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala