ट्रंप का ट्रैरिफ वॉर : आईफोन से लेकर नाइके स्नीकर्स और दवाइयां, क्या होगा सबसे महंगा?

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

शनिवार, 5 अप्रैल 2025 (13:46 IST)
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शुरू हुए टैरिफ युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अस्थिर कर दिया है। वैश्विक बाजार में बढ़ती महंगाई और अनिश्चितता के इस दौर में एक सवाल हर उपभोक्ता के मन में उठ रहा है। क्या जल्द ही हमारे पसंदीदा आईफोन, नाइके स्नीकर्स और जरूरी दवाइयों की कीमतें आसमान छूने वाली हैं?

आईफोन : ऐपल के आईफोन, जो प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार के शीर्ष पर काबिज हैं, अब बढ़ती उत्पादन लागत की चपेट में हैं। सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक कमी अभी भी बनी हुई है, जिसने स्मार्टफोन निर्माण को महंगा बना दिया है। इसके अलावा, एल्यूमीनियम और लिथियम जैसे कच्चे माल की कीमतों में उछाल, ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए आईफोन मॉडल की कीमत पिछले साल की तुलना में 10-15% तक बढ़ सकती है। भारत जैसे बाजारों में, जहां डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी एक बड़ी चुनौती है, यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के लिए भारी पड़ सकती है। ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने अमेरिका और चीन के बीच व्यापार पर असर डाला है, जिससे ऐपल जैसी कंपनियों को उत्पादन लागत और भी बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। एक अनुमान के अनुसार जो आईफोन 16 अभी अमेरिका में 799 डॉलर का है वो 1149 डॉलर तक और आईफोन 16 प्रोमैक्स 1599 से बढ़कर 2300 डॉलर तक पहुंच सकता है।

महंगाई की मार के मारे ये ब्रांड : नाइके स्नीकर्स, जो स्ट्रीटवेयर और युवा फैशन का प्रतीक हैं, भी महंगाई की मार से अछूते नहीं हैं। रबर, कपास और सिंथेटिक सामग्री जैसे कच्चे माल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। साथ ही, एशिया में बढ़ती श्रम लागत और वैश्विक शिपिंग संकट- जिसमें कंटेनर की कीमतें पिछले दो वर्षों में तीन गुना हो गई हैं, ने नाइके जैसे ब्रांड्स पर दबाव बढ़ाया है। माना जा रहा है कि कुछ लोकप्रिय स्नीकर मॉडल्स, खासकर लिमिटेड एडिशन डिज़ाइनों की कीमत में 8-12% की बढ़ोतरी हो सकती है। ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित आयात शुल्कों ने अमेरिकी बाजार में नाइके जैसे ब्रांड्स की लागत को और बढ़ा दिया है, जिसका असर भारत जैसे देशों में भी देखा जा सकता है, जहां स्नीकर्स का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है।

फार्मा सेक्टर : दवाइयों पर महंगाई की मार : फार्मास्युटिकल सेक्टर भी इस संकट से अछूटा नहीं है और आम जनता के लिए चिंता का विषय बन रहा है। दवाइयों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) की कीमतें, जो ज्यादातर चीन और भारत से आयात की जाती हैं, पिछले एक साल में 20-30% तक बढ़ गई हैं। इसके पीछे वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावटें, ऊर्जा लागत में वृद्धि और कड़े पर्यावरण नियम प्रमुख कारण हैं। भारत में जेनेरिक दवाओं की कीमतें, जो मध्यम वर्ग के लिए जीवन रेखा हैं, भी प्रभावित हो रही हैं। उदाहरण के लिए, पैरासिटामोल और एंटीबायोटिक्स जैसी जरूरी दवाओं की कीमतों में 5-10% की बढ़ोतरी संभव है। ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने चीनी आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर इस संकट को और गहरा कर दिया है, जिससे दवा निर्माताओं को लागत बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और ट्रंप का टैरिफ युद्ध : यह सब कुछ वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहरे संकट के बीच हो रहा है। यूक्रेन-रूस संघर्ष, तेल और गैस की बढ़ती कीमतें, और ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका द्वारा शुरू किया गया टैरिफ युद्ध वैश्विक बाजार को अस्थिर कर रहा है। ट्रंप ने अपने कार्यकाल में और हाल की नीतियों में चीन और अन्य देशों से आयात पर भारी शुल्क लगाने की रणनीति अपनाई है, जिसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। मुद्रास्फीति कई देशों में दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया है, और यह लागत अंततः उपभोक्ताओं पर डाली जा रही है। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां आयात पर निर्भरता अधिक है, यह संकट और भी गंभीर हो सकता है।

क्‍या सबसे महंगा साबित होगा : अब सवाल यह है कि इन तीनों में से कौन सबसे अधिक महंगा साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आईफोन की कीमतें टेक्नोलॉजी की मांग और नवाचार पर निर्भर करेंगी, नाइके स्नीकर्स का भविष्य फैशन ट्रेंड्स और ब्रांड वैल्यू से जुड़ा है, जबकि दवाइयों की कीमतें स्वास्थ्य नीतियों और सरकारी नियंत्रण पर निर्भर करेंगी। भारत जैसे बाजार में जहां युवा वर्ग टेक्नोलॉजी और फैशन के प्रति उत्साहित है, वहीं मध्यम वर्ग के लिए दवाइयों की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने इन सभी क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जिससे यह अनुमान लगाना और मुश्किल हो गया है कि उपभोक्ता किसे प्राथमिकता देंगे।

क्‍या आप नया आईफोन लेंगे : क्या आप नया आईफोन खरीदने के लिए तैयार हैं, अपने स्टाइलिश नाइके स्नीकर्स को प्राथमिकता देंगे, या बढ़ती दवा कीमतों के लिए बचत करेंगे? यह एक कठिन चुनाव है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता और ट्रंप के टैरिफ युद्ध के प्रभाव के बीच और भी जटिल हो गया है। आने वाले महीनों में ये सभी क्षेत्र उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ सकते हैं। वैश्विक बाजार की इस अस्थिरता में, एक बात तो साफ है- आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। अब यह आप पर निर्भर है कि आप अपने बजट और जरूरतों को कैसे संतुलित करते हैं।
Edited By: Sandeep Singh Sisodiya

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी