Supreme Court refuses : उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने 2018 की चुनावी बॉण्ड (electoral bonds) योजना के तहत राजनीतिक दलों को मिले 16,518 करोड़ रुपए जब्त करने का निर्देश देने संबंधी याचिकाओं को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार करने से इंकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने उच्चतम न्यायालय के 2 अगस्त, 2024 के फैसले के खिलाफ खेम सिंह भाटी द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार द्वारा शुरू की गई राजनीतिक वित्तपोषण की चुनावी बॉण्ड योजना को 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 15 फरवरी को रद्द कर दिया था। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद, योजना के अंतर्गत अधिकृत वित्तीय संस्थान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने आंकड़ों को निर्वाचन आयोग के साथ साझा किया जिसने बाद में इसे सार्वजनिक कर दिया।
याचिका में दलील दी गई कि कि चुनावी बॉण्ड योजना और विभिन्न वैधानिक प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करने का प्रभाव यह है कि उक्त योजना कभी अस्तित्व में ही नहीं थी और यह शुरू से ही अमान्य है तथा कानून की यह स्थापित स्थिति है कि न्यायालय केवल कानून का अनुपालन करता है, कानून नहीं बनाता है। पुनर्विचार याचिका में दावा किया गया कि 2 अगस्त, 2024 के फैसले ने ''एडीआर के फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से संशोधित कर दिया।(भाषा)