'महाराष्ट्र बंद' वापस, तनाव समाप्त, सभी सेवाएं बहाल

बुधवार, 3 जनवरी 2018 (20:45 IST)
मुंबई। दलित नेता प्रकाश अम्बेडकर के महाराष्ट्र बंद को 5 बजे से वापस लेने की घोषणा के बाद मुंबई समेत पूरे राज्य में सभी सेवाएं फिर से शुरू हो गई है। मुंबई में बंद की समाप्ति की बाद घाटकोपर से अंधेरी के बीच चलने वाली मेट्रो रेल, लोकल ट्रेन और बस सेवा शुरू हो गई। मुंबई में बंद वापस लेने की घोषणा के साथ ही दुकान और बाजार खुलने लगे हैं।


सुबह से मुंबई में चारों तरफ तनाव का माहौल था वह अब समाप्त हो गया। राज्य में सुबह जो लोग कार्यालय पहुंच गए थे उन्हें घर वापस लौटने के समय ट्रेन की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। सुबह से मुंबई में चारों तरफ तनाव का माहौल था वह अब समाप्त हो गया।

मुंबई हवाईअड्डे पर 12 उड़ानें रद्द, 235 में देरी : दलित नेताओं द्वारा महाराष्ट्र में बुलाए गए बंद के कारण मुंबई हवाईअड्डे पर उड़ानों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ और 12 उड़ानें रद्द की गई जबकि 235 में देरी हुई। दुनिया भर के हवाईअड्डों पर उड़ानों की स्थिति पर नजर रखने वाले एक वेबसाइट के अनुसार छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर 182 उड़ानों की रवानगी और 53 का आगमन शाम करीब चार बजे तक टला रहा।

वेबसाइट के अनुसार रद्द हुई 12 उड़ानों में सात रवानगी की थीं जबकि पांच आने वाली उड़ानें थीं। संपर्क किए जाने पर मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा लिमिटेड (एमआईएएल) के एक प्रवक्ता ने कहा कि ‘उड़ानें समय पर आ रही हैं और रवाना हो रही हैं।’

संसद में पुणे हिंसा मामले की गूंज, कार्यवाही बाधित : महाराष्ट्र के पुणे में हुई हिंसा का मुद्दा आज संसद के दोनों सदनों में गूंजा और विपक्ष ने भारी हंगामा किया जिसके चलते कार्यवाही कई बार बाधित हुई। लोकसभा में प्रश्नकाल हुआ पर शून्यकाल की कार्यवाही बाधित हुई और बाद में कांग्रेस सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। उनकी मांग थी कि इस घटना की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए और दलितों पर अत्याचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री सदन में वक्तव्य दें।

राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार हगामा हुआ और भोजनावकाश तक हंगामे के कारण कोई कामकाज नहीं हुआ लेकिन भोजनावकाश के बाद हंगामे के बीच तीन तलाक संबंधित विधेयक पेश किया गया। विपक्षी सदस्य इसे प्रवर समिति के पास भेजे जाने की मांग को लेकर अड़े रहे जिसके कारण सदन में अव्यवस्था फैल गई और कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में भी भोजनावकाश के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग विधेयक पर हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में सुबह शून्यकाल और प्रश्नकाल के दौरान जब विपक्षी सदस्यों ने पुणे हिंसा का मुद्दा उठाने की कोशिश की तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक स्थगित कर दी।

भोजनावकाश के बाद कार्यवाही शुरू होते ही बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा ने इस मुद्दे को फिर से उठाया और कहा कि उनके पार्टी के साथ ही कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने इसको लेकर नियम 267 के तहत कार्यस्थगन का नोटिस दिया हुआ है। इसलिए कार्य स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराई जानी चाहिए।

उप सभापति पीजे कुरियन ने कहा कि सभापति इस मुद्दे पर अपनी व्यवस्था दे चुके हैं इसिलए वह इस पर कुछ नहीं करने वाले हैं। इसलिए सदस्यों को शांत होकर महत्वपूर्ण मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा शुरू करनी चाहिए। इस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सदस्य नारे बाजी करते हुए सभापति के आसन की ओर पहुंचने की कोशिश करने लगे।

इसी दौरान कुरियन ने सदन की कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में पुणे के निकट भीमा-कोरेगांव में कल दलितों और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

दलितों को न्याय दिलाएं, सामंतवादियों पर लगाम लगाएं : अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने रोहतक में आज कहा कि जाट समाज महाराष्ट्र में पुणे के भीमा कोरेगांव (पुणे-महाराष्ट्र) में दलितों पर हुए हमलों की निंदा करता है और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर दलितों को न्याय दिलाने और उन पर हमला करने वालों को सख्त सजा देने तथा सामंतवादी ताकतों पर लगाम लगाने की मांग करता है।

मलिक ने कहा कि कहा कि भीमा कोरेगांव (पुणे-महाराष्ट्र) का 200 वर्ष पुराना संघर्ष दलित पिछड़ी जातियों (महार, मराठा, कुनवी आदि) का पेशवाओं द्वारा पिछड़ी व दलित जातियों पर अन्याय व अत्याचार के खिलाफ संघर्ष था, जिसमें सभी पिछड़ी व दलित जातियों ने मिलकर पेशवाओं को हराया था, लेकिन आज भी सामंतवादी ताकतें उस संघर्ष को लड़ने वाले वीरों के अनुयायियों पर हमला कर बदले का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आवश्यकता है कि पिछड़ी व दलित जातियां एकजुट होकर ऐसी सामंतवादी ताकतों के खिलाफ शांतिपूर्वक अभियान की शुरूआत करें। मलिक ने दावा किया कि जाट समाज हमेशा से ही ऐसी सामंतवादी ताकतों के खिलाफ सभी पिछड़ी जातियों को एकजुट कर संघर्षरत रहा है। 

उन्होंने कहा कि हरियाणा में भी 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान ऐसी तमाम साजिशों से हरियाणा का भाईचारा तोड़ने का प्रयास किया गया था, जिसमें हरियाणा की पिछड़ी जातियों को आपसी संघर्ष में झोंकने का प्रयास किया गया था।

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी