Hindu dharma: प्रसाद दाएं हाथ में ही क्यों लिया जाता है?

बुधवार, 26 जुलाई 2023 (16:30 IST)
Rule of taking Prasad : हिन्दू सनातन धर्म व संस्कृति में भगवान को हम जो नैवेद्य अर्पित करते हैं उसे ही हम प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। पूजा-पाठ या आरती के बाद तुलसीकृत जलामृत व पंचामृत के बाद बांटे जाने वाले पदार्थ को प्रसाद कहते हैं। पूजा के समय जब कोई खाद्य सामग्री देवी-देवताओं के समक्ष प्रस्तुत की जाती है तो वह सामग्री प्रसाद के रूप में वितरण होती है। प्रसाद को दाएं हाथ से ही लेना चाहिए बाएं हाथ से नहीं। आओ जानते हैं कि इसके पीछे का क्या है कारण।
 
प्रसाद चढ़ावें को नैवेद्य, आहुति और हव्य से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन प्रसाद को प्राचीन काल से ही नैवेद्य कहते हैं जो कि शुद्ध और सात्विक अर्पण होता है। इसके संबंध किसी बलि आदि से नहीं होता। हवन की अग्नि को अर्पित किए गए भोजन को हव्य कहते हैं। यज्ञ को अर्पित किए गए भोजन को आहुति कहा जाता है। दोनों का अर्थ एक ही होता है। हवन किसी देवी-देवता के लिए और यज्ञ किसी खास मकसद के लिए। नैवेद्य, आहुति और हव्य में जो भी बच जाता है उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।
 
बाएं हाथ से क्यों नहीं देते हैं प्रसाद?
 

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी