तू झूठी मैं मक्कार फिल्म समीक्षा: बिना बात का ड्रामा

समय ताम्रकर

गुरुवार, 9 मार्च 2023 (16:38 IST)
लव रंजन युवाओं के लिए फिल्म बनाते हैं। उनके पात्र अत्याधुनिक होते हैं जो प्यार और ब्रेकअप के बीच उलझे रहते हैं और किसी तरह के कमिटमेंट से बचते हैं। अपनी नई फिल्म 'तू झूठी मैं मक्कार' में लव ने लव स्टोरी में थोड़ा फैमिली ड्रामा भी डाल दिया है और उस आरोप से बचने की कोशिश की है कि उनकी फिल्में महिला विरोधी होती हैं। 
 
लव रंजन की दूसरी फिल्मों की तरह यहां भी उनका हीरो मिकी (रणबीर कपूर) अरबपति है। मल्टीपल बिज़नेस है। दिन भर पार्टी चलती रहती है। मिकी का एक शौक भी है जिसे वो 'कला' का नाम देता है। वह ऐसे प्रेमी-प्रेमिकाओं के ब्रेकअप कराने में मदद करता है जो बिना विलेन बने ब्रेकअप करना चाहते हैं। 
 
मिकी को एक दिन बोल्ड लड़की टिनी (श्रद्धा कपूर) से प्यार हो जाता है। दोनों की सगाई होने वाली रहती है, लेकिन अचानक टिनी इस रिश्ते को तोड़ना चाहती है। वह ऐसा क्यों करती है? मिकी के पार्टटाइम शौक का इसमें क्या रोल है? इनके जवाब फिल्म के अंत में मिलते हैं। 
 
लव रंजन और राहुल मोदी ने मिलकर फिल्म को लिखा है। फिल्म शुरुआत में बेहद मॉडर्न और लीक से हटकर होने का आभास देती है, लेकिन अंत में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों जैसी हो जाती है। 
 
मिकी को बेहद आधुनिक दिखाया गया है। रोमांस और डेटिंग का वह मखौल उड़ाता है। लेकिन कहानी के अंत में वह अचानक पारिवारिक बन जाता है। दूसरी ओर टिन्नी को भी आधुनिक दिखाया गया है। टिन्नी अपनी 'स्पेस' और आजादी को बेहद महत्व देती है, मिकी की फ्लर्टिंग से बहुत ज्यादा प्रभावित होकर उससे शादी करने का फैसला करती है। मिकी के परिवार की जरूरत से ज्यादा दखलअंदाजी को उसके जैसी होशियार लड़की गलत कैसे समझ लेती है, यह समझ से परे है। 
 
फिल्म का पहला हॉफ बोर है। किरदार जरूरत से ज्यादा बोलते हैं, और ऐसी बातें बोलते हैं जिसका कोई मतलब नहीं निकलता। मिकी और टिन्नी की लव स्टोरी ऐसी नहीं है कि दर्शक उनके प्यार में डूब जाएं। निर्देशक और लेखक ने घटनाओं को महत्व न देते हुए किरदारों की आपसी बातचीत को ज्यादा महत्व दिया है, लेकिन ये बक-बक ज्यादा लगती है। निश्चित रूप से कुछ लाइनें ऐसी हैं जिस पर हंसी आती हैं, लेकिन ऐसी लाइनें बहुत कम है। 
 
स्क्रिप्ट की कुछ खामियां ऐसी हैं जिसके बारे में यहां इसलिए नहीं लिखा जा सकता क्योंकि कहानी के कुछ भेद खुल सकते हैं। मसलन रोमांस करने वाले दो प्रेमी एक अंजान नंबर पर एक-दूसरे को कॉल करते हैं और आवाज नहीं पहचान पाते।  
 
दूसरे हाफ में लव स्टोरी, फैमिली ड्रामा में बदल जाती है। लेकिन यहां पर भी ड्रामा मनोरंजनक नहीं बन पाता। फिल्म के अंतिम 20 मिनट जरूर शानदार हैं, जब टिनी के लंदन जाने के पहले मिकी उससे मिलता है और अंत में मिकी का पूरा परिवार एअरपोर्ट की ओर भागता है, लेकिन इन मजेदार 20 मिनटों के लिए आपको पूरी फिल्म झेलना पड़ती है, और यह सौदा महंगा है। 
 
बतौर निर्देशक लव रंजन ने फिल्म की विज्युअल अपील पर ज्यादा ध्यान दिया है। एक्टर्स की ड्रेसेस, सेट और उनकी लाइफस्टाइल आंखों को सुकून देती है। उनके बोलने का अंदाज 'कूल' है, लेकिन स्क्रिप्ट के मामले में यह फिल्म उतनी 'कूल' नहीं है। हीरो को बिना शर्ट और हीरोइन को टू-पीस बिकिनी में दिखाकर उन्होंने युवाओं को रिझाने और फिल्म को 'मॉडर्न' बनाने की कोशिश की है। 
 
गानों को उम्दा फिल्माया गया है। प्रीतम का संगीत अच्छा है और एक-दो गाने हिट भी हो चुके हैं। सिनेमाटोग्राफी और सेट डिजाइनिंग शानदार है। 
 
फिल्म का एक्टिंग डिपार्टमेंट मजबूत है। रणबीर कपूर ने अपने किरदार को बेहद सहजता के साथ निभाया है। श्रद्धा कपूर का अभिनय भी अच्छा है, लेकिन उनका मेकअप कहीं अच्छा और कहीं बुरा है। डिम्पल कपाड़िया, हसलीन कौर, जतिंदर कौर, अनुभव सिंह बस्सी अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। कार्तिक आर्यन और नुसरत भरुचा, लव रंजन की फिल्मों का हिस्सा रहे हैं इसलिए यहां उन्होंने कैमियो किए हैं। 
 
'तू झूठी मैं मक्कार' का एक संवाद है- 'बिना बात के ड्रामा हुआ' जो फिल्म पर फिट बैठता है। 

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