वेलेंटाइन डे पर कविता : वेलेंटाइन के मौसम में

दिल ही दिल बिक रहे
प्यार का चढ़ा खुमार 
जिसका टूटा दिल बेचारा
पड़ गया वह बीमार
वेलेंटाइन के मौसम में
मजनुओं की घूम रही टोली
कोई मना रहा दीवाली
तो कोई लैला किसी की हो-ली
 
इश्क का जुनून
हर एक के सर चढ़ बोला
किसी ने किया प्रपोज़
किसी ने दिल न खोला
 
हाथों में हाथ लिए घूम रहीं
बगीचे में जोडियां बेशुमार
महबूबा को दिया किसी ने गुलाब
किसी ने पूरा किया इकरार
 
मुहब्बत के रंग में रंगा है मौसम
वासंती है हवा वासंती है नज़ारे
जवां मन की बात तो निराली है
बूढ़ों के भी नयन हो रहे कजरारे
 
मदन के चल रहे बाण हर तरफ
नयनों की चितवन बोल रही
कहीं व्हाट्स अप ने दिल खोला
तो कहीं ई मेल से बात कही
 
कहीं मौन संकेत किए जा रहे
कहीं अंखियों से मन का भेद खुला
बहुत शोर करते रहे जो साल भर
हाथों में उनके सॉरी का पर्चा मिला
 
सात दिनों का वेलेंटाइन त्योहार
जवां दिलों का अपना हो गया
प्रेम के किस्से कहानियों का अब
बहुतों का पूरा सपना हो गया
 
ऋतुराज बसंत के आगमन पर
यहां न कोई चहका न महका
वेलेंटाइन के नाम पर देखो
प्रेम चहुं ओर है बहका बहका
 
पूरब और पश्चिम भेद नहीं अब
ग्लोबलाइज़ है यह दुनिया
वासंती पर्व हो या वेलेंटाइन
प्रेम की दीवानी है यह दुनिया.... 
 
                           

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