दशहरे-दिवाली का विदेशी संस्करण

डॉ. मुनीश रायजादा

मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014 (12:12 IST)
क्रिकेट और त्योहार- ये दो ऐसी चीजे हैं, जो देश-विदेश में कहीं भी रह रहे भारतीयों को एकता के सूत्र में बांध देती हैं। हमने अभी-अभी विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया है और अब दीपावली तक त्योहारों का माहौल रहेगा।
 

 
अमेरिका में रह रहे हिन्दू भी भारतीय हिन्दुओं की तरह ही इन सब त्योहारों को पूरे हर्षोल्लास से मनाते हैं। अमेरिका में आतिशबाजी (कन्ज्यूमर फायर वर्क्स) के इस्तेमाल से संबंधित कानून बहुत अधिक सख्त हैं। पटाखों के भी इसी श्रेणी में शामिल होने के कारण ‘रावण दहन’ और दीपावली की आतिशबाजी के कार्यक्रम प्राय: मंदिरों के प्रांगण में ही होते हैं।
 
अमेरिकी जनसंख्या का लगभग 0.4 प्रतिशत भाग हिन्दू हैं। पिछले वर्ष हवाई राज्य की तुलसी गेबार्ड का नाम काफी चर्चा में रहा था। वे अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनी जाने वाली पहली हिन्दू थीं। हिन्दू जनसंख्या में हो रही वृद्धि के साथ ही यहां हिन्दू मंदिरों की संख्या भी बढ़ी है।
 
वर्तमान में अमेरिका में 50 के करीब प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर हैं जिनमें लॉस एंजिल्स का मलिबु हिन्दू मंदिर और डाउनी (कैलीफोर्निया) का स्वामीनारायण मंदिर भी शामिल हैं। इनमें से कुछ मंदिर बहुत विशाल भू-भाग पर बने हैं। इनकी आकर्षक वास्तुकला (आर्किटेक्चर) देखने योग्य होती है, साथ ही यहां आपको वही आध्यात्मिक वातावरण व शांति मिलती है जिसके लिए हिन्दू धर्म जाना जाता है। उदाहरण के लिए शिकागो के लेमोंट हिन्दू मंदिर, स्वामीनारायण मंदिर, बालाजी मंदिर (ऑरोरा में स्थित) की भव्यता देखते ही बनती है।
 
भारतीयों की बहुलता वाले शहरों में तो इन मंदिरों में हफ्ते के सातों दिन रौनक रहती है। ये मंदिर बच्चों के लिए हिन्दी, संस्कृत व अन्य भारतीय भाषाओं की कक्षाएं चलाते हैं व छोटे पुस्तकालयों का संचालन करते हैं। इनमें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों (जैसे भारतीय शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता), कीर्तन, पूजा का आयोजन होता रहता है।
 
यहां लगभग हर त्योहार मनाया जाता है। साथ ही इनके कैफेटेरिया में आप भारतीय व्यंजनों का स्वाद भी ले सकते हैं। इस प्रकार ये मंदिर भारतीय लोगों के लिए मेल-मिलाप की एक जगह के रूप में भी कार्य करते हैं। भारत में जहां त्योहारों का आयोजन शोर-शराबे से भरा होता है, वहीं अमेरिका में त्योहार अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित रूप में एक ‘सार्वजनिक कार्यक्रम’ के रूप में मनाए जाते हैं।
 
अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों के बहुत से सामाजिक संगठन व संस्थाएं हैं। इनमें से अधिकतर संस्थाएं भारतीय लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं, परंतु कुछ क्षेत्रीय (जैसे गुजराती), भाषायी (पंजाबी) और यहां तक कि जातीय (नॉर्थ अमेरिका काकड़वा पटेल समाज) आधार पर भी बनी हुई हैं।
 
ये सभी संस्थाएं मुख्य पर्वों व त्योहारों का आयोजन करती हैं। इन त्योहारों को पूर्ण रूप से हिन्दू रीति-रिवाजों के तहत मनाया जाता है। लोग पारंपरिक भारतीय परिधान पहनते हैं, भारतीय व्यंजन बनाए जाते हैं, भारतीय गीत गाए जाते हैं। इस प्रकार से ये आयोजन आपको भारत में होने का एहसास करा देते हैं।
 
अमेरिका में होने वाले भारतीय उत्सवों का एक रोचक पहलू यह भी है कि यहां सभी आयोजन अधिकतर सप्ताहांत में होते हैं ताकि अधिक से अधिक संख्या में लोग इनमें हिस्सा ले सकें। उदाहरण के लिए विजयादशमी चाहे हफ्ते में किसी भी दिन पड़ रही हो, ‘रावण दहन’ का आयोजन उस हफ्ते के अंत में ही होगा।
 
इसके अलावा अमेरिका के कुछ भागों (जैसे न्यूयॉर्क) में कैरिबियन हिन्दुओं की भी अच्छी-खासी तादाद पाई जाती है। इन लोगों के पूर्वज उत्तरप्रदेश और बिहार से लगभग 180 साल पहले अंग्रेजों द्वारा वेस्टइंडीज व सूरीनाम जैसे देशों में लाए गए थे।
 
अमेरिका में बसे वेस्टइंडियन हिन्दुओं के अपने अलग मंदिर हैं। मैं न्यूयार्क के जमैका स्थित सूर्यनारायण मंदिर में जा चुका हूं। उनकी धर्म को जीवित रखने की आदर्शोक्ति (मोटो) एक प्रकार से सभ्यता व संस्कृति को अक्षुण्ण रखने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।
 
अमेरिका में बसे वेस्टइंडियन सामान्यतः हिन्दी नहीं जानते हैं। ये लोग कभी भारत भी नहीं गए, परंतु उनके मंदिर उनकी आस्था तथा विरासत का जीवंत प्रतिनिधित्व करते हैं। ‘सीताराम’ कहकर इनके द्वारा किया गया अभिवादन आपको इनकी भारतीय जड़ों की पहचान करा देता है।
 
 

शिकागो में भारतीय : प्रवासी भारतीयों के इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए मिशिगन झील के किनारे बसा शिकागो शहर एक विशिष्ट स्थान रखता है। ‘तूफानी शहर’ (विंडी सिटी) के नाम से जाने जाने वाला शिकागो शहर अमेरिका के मध्य-पश्चिम भाग में स्थित है।
 
मिशिगन झील उत्तरी अमेरिका की 5 सबसे बड़ी झीलों में से एक है। 94 हजार वर्ग मील क्षेत्रफल में फैली इस झील का विस्तार अमेरिका से लेकर कनाडा तक है। ये 5 झीलें आपस में जुड़ी हुई हैं और सम्मिलित रूप से दुनिया में मीठे पानी का सबसे बड़ा भंडार बनाती हैं। हालांकि इन्हें 'झील' कहा जाता है, परंतु इनके कुछ गुण, जैसे तेज हवाएं, लहरें, इनकी गहराई और दूर तक फैला क्षितिज इन्हें समुद्र के समकक्ष ला खड़ा करता है। 
 
1833 में अपनी स्थापना के समय 350 लोगों की जनसंख्या वाला शिकागो शहर आज लगभग 27 लाख लोगों का घर बन चुका है और अगर शिकागो के उपनगरीय क्षेत्रों को मिलाकर बने ‘ग्रेटर शिकागो’ को देखा जाए तो यह संख्या 95 लाख तक पहुंच जाती है।
 
शिकागो व भारत के बीच रिश्तों का पहला उल्लेखनीय वर्णन सन् 1893 में मिलता है। शिकागो ने इस साल जुलाई महीने में आयोजित विश्व धर्म संसद की मेजबानी की थी। इसी धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने विश्व का परिचय हिन्दू धर्म से कराया था। ‘मेरे अमेरिका के भाइयों और बहनों’ संबोधन से शुरू हुए इनके उस उद्बोधन को आज भी विश्व के श्रेष्ठ उद्बोधनों में से एक माना जाता है।
 
शिकागो में भारतीयों के आगमन का पहला प्रमाण सन् 1911-12 में मिलता है। चन्द्र लक्ष्मणसिंह सन् 1911 में ग्रेनाडा (वेस्टइंडीज) से न्यूयॉर्क आए थे और बाद में शिकागो आकर बस गए। रोचक बात तो यह है कि सिंह और उनकी धर्मपत्नी सन् 1929-32 के बीच महात्मा गांधी के साथ भारत की स्वतंत्रता के लिए कार्य करने हेतु भारत भी गए थे।
 
बड़े समूहों में भारतीयों के शिकागो आने का पहला वर्णन सन् 1960 के आसपास ही मिल पाता है और तब से लेकर आज तक भारत और शिकागो के बीच बंधन और अधिक मजबूत ही हुआ है। परिणामत: शिकागो आज न्यूयॉर्क के बाद अमेरिका में सबसे अधिक प्रवासी भारतीयों की संख्या वाला दूसरा शहर है।
 
2010 में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शिकागो में रहने वाले भारतीयों की संख्या उसकी कुल जनसंख्या का 1.8 प्रतिशत है अर्थात शिकागो में लगभग 1.75 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं। आज की भांति ही सन् 1960 के दशक में भी भारतीय लोग शिकागो में अच्छी शिक्षा व रोजगार की तलाश में ही आए थे।
 
जैसे-जैसे ये लोग इस शहर में अपनी जड़ें जमाते गए, इन्होंने अपने परिवार को भी यहीं बुला लिया और यहीं शिकागो में बसना शुरू हो गए। उन्हीं की बदौलत प्रशिक्षित डॉक्टरों, इंजीनियरों, प्रबंधकों और उद्यमियों से युक्त भारतीय समुदाय ने पिछले कुछ दशकों से इस शहर के विकास में काफी योगदान दिया है। 
 
हालांकि इस जनसंख्या का बड़ा भाग विद्यार्थियों से बना है, जो शिकागो स्थित विश्वविद्यालयों में शिक्षा लेने आते हैं। शिकागो का भारतीय समुदाय गुजराती व तेलुगु बहुल है, लेकिन भारत के बाकी प्रांतों व क्षेत्रों से आए लोग इस भारतीय इन्द्रधनुष को पूरा करते हैं।
 
इनकी बड़ी संख्या शिकागो के आसपास फैले उपमहानगरों (सब-अर्ब) जैसे ओक-ब्रूक, नैपेर-विल, डेस-प्लेन व बफैलो-ग्रूव में बसी है। एक मुख्य नगर होने के नाते शिकागो में भारतीय वाणिज्य दूतावास भी है। 
 
हालांकि हमने कोई बड़ा कारनामा नहीं किया है फिर भी यह कहने में मुझे कोई हिचक नहीं है कि शिकागो में भारतीयों ने एक ‘मिनी इंडिया’ बसा लिया है, जहां आपको अपनी रुचि व स्वभाव की चीजें मिल जाएंगी।
 
हालांकि शिकागो में रह रहे भारतीयों को जब भी घर की याद आती है, तो वे ‘छोटे भारत’ के नाम से जाने जाने वाले डेवोन एवेन्यू की ओर रुख कर सकते हैं। डेवोन स्ट्रीट शिकागो के उत्तरी भाग में लोयोला विश्वविद्यालय परिसर के नजदीक है।
 
डेवोन के लगभग 2 मील के क्षेत्र में आप भारतीय व पाकिस्तानी व्यापारियों की बहुत-सी दुकानें पाएंगे। डेवोन एवेन्यू की सैर आपको कुछ ही क्षणों में भारत भ्रमण करा देगी। यहां आपको रेस्टॉरेंटो में भारतीय पकवानों, बुटीकों में साड़ी व लहंगों सहित वह सब कुछ मिलेगा, जो आपको भारत की याद दिलाता है।
 
पिछले कई वर्षों से डेवोन एवेन्यू में कुछ भारतीय संस्थाओं के समूह द्वारा 15 अगस्त की परेड का आयोजन भी नियमित किया जाता रहा है। इसी प्रकार डेवोन स्ट्रीट से कुछ साप्ताहिक देशी समाचार पत्र भी प्रकाशित होते हैं।
 
लेखक शिकागो (अमेरिका) में नवजात शिशुरोग विशेषज्ञ तथा सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणीकार हैं।

 

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