नवीन रांगियाल

लेखक वेबदुनिया से संबद्ध हैं।
ट्रंप ने आरोप लगाया है कि जॉर्ज के लिए शुरू हुए आंदोलन को हाइजैक कर लिया गया है
गाहे-बगाहे अब भी उनके कहन में बंटवारे की त्रासदी का दर्द छलक आता है।
वहां कुत्‍तों को बेरहमी से मारा-काटा जाता है और फि‍र स्‍वाद के ल‍िए थाली में परोसकर खाया जाता है।
एक महीने पहले 29 अप्रैल ह‍िंदी फ‍िल्‍मों के सबसे काबि‍ल अभि‍नेता ने दुन‍िया को अलविदा कह द‍िया था।
लॉकडाउन के दौरान टीवी एक्टर्स द्वारा की गई यह दूसरी आत्महत्या है
प‍िछले कुछ सालों में पत्रकार और पत्रकार‍िता का स्‍वरुप बदल गया है। इसकी पर‍िभाषा और उदा‍हरण भी।
राजनीति में आये तो सीधे राज्यसभा सांसद और उसके बाद मध्यप्रदेश से टूटकर बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बन गए।
वे मीड‍िया से दूर रहते हैं और उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में भी लोग ज्‍यादा नहीं जानते हैं।
सावरकर क्रांतिकारी तो थे ही, लेकिन वे कवि थे, साहित्‍यकार और लेखक भी थे। हो सकता है, क्रांतिकारी मकसद की वजह से उन्‍होंने...
उन्‍हें हाल ही में एक मामूली द‍िल का दौरा आया था। इसके बाद उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था
कोरोना काल में पुल‍ि‍स ने अपनी सख्‍त छव‍ि को मानवीयता में बदलने का काम बखूबी क‍िया है।
कोरोना महामारी के संकट ने दूसरी चीजों की तरह ही साहि‍त्‍य को भी प्रभाव‍ित क‍िया है।
गांव फुलेरा, जहां उसकी नौकरी लगी है वहां कई समस्‍याएं भी हैं।
वो जो कर रहे हैं, वह क‍िसी आर्थि‍क मदद से कई गुना ज्‍यादा है। दरअसल देशभर में लॉकडाउन में फंसे मजदूर घर जाना चाहते हैं
इसी लॉकडाउन में ऐसा ही एक द‍िलचस्‍प मामला सामने आया है।
न उन्‍हें कि‍सी से म‍िलने की अनुमत‍ि है और न ही बाहर जाने की।
कुत्तों को उसने ज़्यादातर भोगने के लिए दुन‍िया में छोड़ दिया है। यह एक तरफा दुर्भाग्य है। कहीं कोई आसरा नहीं। विदाउट...
ये वही दौर है ज‍िसमें भूख मौत से बड़ी हो गई है। उसका कद और उसकी भयावहता पेट के दर्द के सामने छोटे हो गए हैं।
हमारा स‍िस्‍टम भी शायद ऐसे ही क‍िसी पाताल लोक की गहराई ल‍िए हुए है। जो बाहर से या ऊपर से साफ-सुथरा और व्‍यवस्‍थि‍त नजर...